📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
विज्ञान
हरियाणा के विस्तार योजना पर अध्ययन ने वेस्ट‑टू‑एनर्जी प्लांट्स के जलवायु प्रभाव को उजागर किया
✍️ Hindustan Times
🗓 30 अक्टू. 2026, 07:45 PM
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एक नवीन अध्ययन ने वेस्ट‑टू‑एनर्जी (WTE) संयंत्रों से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों को उजागर किया, जबकि हरियाणा इन प्लांटों का विस्तार करने की योजना बना रहा है।
एक स्वतंत्र पर्यावरण संस्थान द्वारा तैयार किए गए अध्ययन ने भारत में वेस्ट‑टू‑एनर्जी (WTE) संयंत्रों के कार्बन पदचिह्न को मापा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नगरपालिका ठोस कचरे के दहन से बड़ी मात्रा में CO₂ और अन्य ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जिससे इस तकनीक के पर्यावरणीय लाभ कम हो जाते हैं।
हरियाणा सरकार ने बढ़ते ठोस‑कचरा बोझ को संभालने के लिए WTE क्षमता बढ़ाने की योजना घोषित की है। अधिकारियों ने इसे लैंडफ़िल दबाव कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में बताया, पर नया अध्ययन नीति निर्माताओं को पूर्ण जीवन‑चक्र उत्सर्जन को ध्यान में रखने की सलाह देता है।
अध्ययन में विशेषज्ञों ने उन्नत उत्सर्जन‑नियंत्रण तकनीकों को अपनाने और रीसाइक्लिंग व कम्पोस्टिंग जैसी वैकल्पिक कचरा‑प्रबंधन विधियों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है, ताकि कुल मिलाकर जलवायु प्रभाव घटाया जा सके। वे पारदर्शी मूल्यांकन ढाँचे की मांग करते हैं, जो कचरा‑कम करने के लक्ष्य को भारत के पेरिस समझौते के प्रतिबद्धताओं के साथ संतुलित करे।
हरियाणा के पर्यावरण विभाग ने कहा है कि वह अध्ययन की सिफारिशों की समीक्षा करेगा और नई WTE सुविधाओं के टेंडर प्रक्रिया में इन्हें शामिल करेगा। अगले वर्ष की शुरुआत में सार्वजनिक परामर्श आयोजित किया जाएगा, जिसमें हितधारक कचरा‑प्रबंधन क्षमता और जलवायु लक्ष्यों के बीच समझौते पर चर्चा करेंगे।
यह रिपोर्ट बड़े‑पैमाने पर इन्किनरेशन परियोजनाओं की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कई राज्यों को अपने WTE रोडमैप को पुनः मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि जलवायु लक्ष्यों के साथ तालमेल बना रहे।
हरियाणा सरकार ने बढ़ते ठोस‑कचरा बोझ को संभालने के लिए WTE क्षमता बढ़ाने की योजना घोषित की है। अधिकारियों ने इसे लैंडफ़िल दबाव कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में बताया, पर नया अध्ययन नीति निर्माताओं को पूर्ण जीवन‑चक्र उत्सर्जन को ध्यान में रखने की सलाह देता है।
अध्ययन में विशेषज्ञों ने उन्नत उत्सर्जन‑नियंत्रण तकनीकों को अपनाने और रीसाइक्लिंग व कम्पोस्टिंग जैसी वैकल्पिक कचरा‑प्रबंधन विधियों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है, ताकि कुल मिलाकर जलवायु प्रभाव घटाया जा सके। वे पारदर्शी मूल्यांकन ढाँचे की मांग करते हैं, जो कचरा‑कम करने के लक्ष्य को भारत के पेरिस समझौते के प्रतिबद्धताओं के साथ संतुलित करे।
हरियाणा के पर्यावरण विभाग ने कहा है कि वह अध्ययन की सिफारिशों की समीक्षा करेगा और नई WTE सुविधाओं के टेंडर प्रक्रिया में इन्हें शामिल करेगा। अगले वर्ष की शुरुआत में सार्वजनिक परामर्श आयोजित किया जाएगा, जिसमें हितधारक कचरा‑प्रबंधन क्षमता और जलवायु लक्ष्यों के बीच समझौते पर चर्चा करेंगे।
यह रिपोर्ट बड़े‑पैमाने पर इन्किनरेशन परियोजनाओं की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कई राज्यों को अपने WTE रोडमैप को पुनः मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि जलवायु लक्ष्यों के साथ तालमेल बना रहे।