📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hunini
रक्षा
जापान चाहता है भारत के मिसाइल रेंज का उपयोग, जानिए क्यों?
✍️ Aaj Tak
🗓 29 अक्टू. 2026, 08:43 AM
👁 3
जापान अपने टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और छोटे हमलावर ड्रोन के परीक्षण के लिए भारत के लंबी दूरी वाले मिसाइल रेंज का उपयोग करना चाहता है, क्योंकि उसके पास ऐसे पर्याप्त क्षेत्र नहीं हैं।
जापान भारत के मिसाइल रेंज का उपयोग करके अपने लंबी दूरी वाले हथियारों का परीक्षण करने का इरादा रखता है। इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और छोटे हमलावर ड्रोन के टेस्ट को शामिल किया गया है। यह कदम जापान के लिए रक्षा क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य कारण जापान के भीतर उपलब्ध भौगोलिक सीमाएँ हैं। जापान के पास इतने बड़े और खुले क्षेत्र नहीं हैं जहाँ लंबी दूरी के हथियारों का सुरक्षित और प्रभावी परीक्षण किया जा सके। इसलिए, भारत के विस्तृत मिसाइल रेंज का उपयोग जापान के लिए एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।
भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके, जापान अपने नए रक्षा परिसंपत्तियों, विशेष रूप से टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल की प्रदर्शन क्षमताओं को सत्यापित कर सकेगा। यह मिसाइल जापान के नौसेना रक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण उन्नति मानी जाती है, जिसके लिए पर्याप्त दूरी पर टेस्टिंग आवश्यक है।
हालाँकि, इस व्यवस्था के विशिष्ट शर्तों और समय-सीमा के बारे में अभी तक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह पहल दोनों देशों के बीच बढ़ती हुई रक्षा साझेदारी को दर्शाती है। यह कदम जापान के लिए अपनी अगली पीढ़ी के हथियारों के तैनाती की प्रक्रिया को तेज करने में मददगार साबित हो सकता है।
इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य कारण जापान के भीतर उपलब्ध भौगोलिक सीमाएँ हैं। जापान के पास इतने बड़े और खुले क्षेत्र नहीं हैं जहाँ लंबी दूरी के हथियारों का सुरक्षित और प्रभावी परीक्षण किया जा सके। इसलिए, भारत के विस्तृत मिसाइल रेंज का उपयोग जापान के लिए एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।
भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके, जापान अपने नए रक्षा परिसंपत्तियों, विशेष रूप से टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल की प्रदर्शन क्षमताओं को सत्यापित कर सकेगा। यह मिसाइल जापान के नौसेना रक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण उन्नति मानी जाती है, जिसके लिए पर्याप्त दूरी पर टेस्टिंग आवश्यक है।
हालाँकि, इस व्यवस्था के विशिष्ट शर्तों और समय-सीमा के बारे में अभी तक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह पहल दोनों देशों के बीच बढ़ती हुई रक्षा साझेदारी को दर्शाती है। यह कदम जापान के लिए अपनी अगली पीढ़ी के हथियारों के तैनाती की प्रक्रिया को तेज करने में मददगार साबित हो सकता है।