📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / RATHOD SRAVAN
देश
SIR पर अमित शाह ने राहुल गांधी और रेवंथ रेड्डी पर 'RR टैक्स' की चोट
✍️ India Today
🗓 03 नव. 2026, 05:38 AM
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी और तेलंगाना मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी पर निशाना साधा है। उन्होंने 'RR टैक्स' शब्द का प्रयोग करते हुए स्टेट इंसेंटिव रिजिम (SIR) की वैधता पर सवाल उठाए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेलंगाना मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी पर स्टेट इंसेंटिव रिजिम (SIR) के मुद्दे पर तीखी राजनीतिक आलोचना की है।
एक कट्टर टिप्पणी में, शाह ने इस नीति को 'आरआर टैक्स' कहा, जिससे यह संकेत दिया गया कि यह पहल एक वास्तविक आर्थिक उपाय के बजाय एक राजनीतिक चाल है। 'आरआर' शब्द का प्रयोग दोनों नेताओं के प्रथम अक्षरों को संदर्भित करता है, जो राज्य की वित्तीय नीति के पीछे व्यक्तिगत एजेंडा का इशारा करता है।
तेलंगाना सरकार ने बड़े कॉर्पोरेट को निवेश के लिए कर छूट प्रदान करने के लिए SIR पेश किया था। हालांकि, आलोचकों, जिनमें शाह भी शामिल हैं, ने तर्क दिया है कि此类 छूट अक्सर राज्य के लिए राजस्व की हानि का कारण बनती हैं, जबकि रोजगार सृजन या आर्थिक विकास की गारंटी नहीं देतीं।
शाह की टिप्पणियों से राज्य स्तरीय कर नीतियों और उनके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के इर्द-गिर्द राजनीतिक बहस को तीव्रता मिलने की उम्मीद है। 'आरआर टैक्स' की यह टिप्पणी केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के बीच आर्थिक शासन को लेकर बढ़ती तनाव को दर्शाती है।
एक कट्टर टिप्पणी में, शाह ने इस नीति को 'आरआर टैक्स' कहा, जिससे यह संकेत दिया गया कि यह पहल एक वास्तविक आर्थिक उपाय के बजाय एक राजनीतिक चाल है। 'आरआर' शब्द का प्रयोग दोनों नेताओं के प्रथम अक्षरों को संदर्भित करता है, जो राज्य की वित्तीय नीति के पीछे व्यक्तिगत एजेंडा का इशारा करता है।
तेलंगाना सरकार ने बड़े कॉर्पोरेट को निवेश के लिए कर छूट प्रदान करने के लिए SIR पेश किया था। हालांकि, आलोचकों, जिनमें शाह भी शामिल हैं, ने तर्क दिया है कि此类 छूट अक्सर राज्य के लिए राजस्व की हानि का कारण बनती हैं, जबकि रोजगार सृजन या आर्थिक विकास की गारंटी नहीं देतीं।
शाह की टिप्पणियों से राज्य स्तरीय कर नीतियों और उनके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के इर्द-गिर्द राजनीतिक बहस को तीव्रता मिलने की उम्मीद है। 'आरआर टैक्स' की यह टिप्पणी केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के बीच आर्थिक शासन को लेकर बढ़ती तनाव को दर्शाती है।