📷 चित्र स्रोत: Hindustan Times (via NewsData)
राजनीति
बच्चों के साथ अपराधों में न्याय तेज़ करने के लिए तमिलनाडु में 26 नए विशेष अदालतों को मंजूरी
✍️ Hindustan Times
🗓 01 नव. 2026, 01:45 PM
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तमिलनाडु सरकार ने बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज़ करने और लंबित मामलों को कम करने के लिए पोकोसो अधिनियम के तहत 26 नई विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी है।
तमिलनाडु राज्य सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पोकोसो (बच्चों से यौन अपराधों से सुरक्षा) अधिनियम के तहत 26 नई विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी है। इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई को तेज़ करना है।
इस कदम का मूल उद्देश्य न्याय की प्रक्रिया को झटपट पूरा करना है, ताकि कानून के आगे बच्चों को न्याय जल्दी मिल सके। विशेष रूप से बनाई गई ये अदालतें केवल पोकोसो मामलों की ही सुनवाई करेंगी, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है।
राज्य भर के विभिन्न जिलों में ये नई विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी, ताकि ज़मीनी स्तर पर भी बच्चों के मामलों की सुनवाई सुचारू रूप से हो सके। यह पहल राज्य सरकार की ओर से बच्चों के कल्याण और न्यायिक प्रणाली की दक्षता बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोकोसो के लिए अलग अदालतें बच्चों के लिए एक सुरक्षित और गोपनीय वातावरण प्रदान करती हैं। सरकार का यह फैसला बच्चों के अधिकारों की रक्षा और संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक विकास है।
इस कदम का मूल उद्देश्य न्याय की प्रक्रिया को झटपट पूरा करना है, ताकि कानून के आगे बच्चों को न्याय जल्दी मिल सके। विशेष रूप से बनाई गई ये अदालतें केवल पोकोसो मामलों की ही सुनवाई करेंगी, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है।
राज्य भर के विभिन्न जिलों में ये नई विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी, ताकि ज़मीनी स्तर पर भी बच्चों के मामलों की सुनवाई सुचारू रूप से हो सके। यह पहल राज्य सरकार की ओर से बच्चों के कल्याण और न्यायिक प्रणाली की दक्षता बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोकोसो के लिए अलग अदालतें बच्चों के लिए एक सुरक्षित और गोपनीय वातावरण प्रदान करती हैं। सरकार का यह फैसला बच्चों के अधिकारों की रक्षा और संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक विकास है।