📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
कृषि
महाराष्ट्र ने सूखा निवारण पैनल स्थापित, बाढ़‑पीड़ित किसानों को 291.91 करोड़ रुपये की राहत
✍️ The Hindu
🗓 03 नव. 2026, 04:44 AM
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महाराष्ट्र सरकार ने सूखा निवारण पैनल का गठन किया और 2026 में कम वर्षा के कारण सूखा घोषित किए गए तालुकों में बाढ़‑पीड़ित किसानों को 291.91 करोड़ रुपये की राहत मंजूर की।
महाराष्ट्र ने सूखा‑निवारण पैनल का गठन किया और बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए 291.91 करोड़ रुपये की राहत निधि स्वीकृत की। यह कदम 2026 में कई जिलों में वर्षा की कमी के कारण कई तालुकों में सूखा घोषित करने के बाद उठाया गया, जहाँ खरीफ मौसम के ट्रिगर‑1 मूल्यांकन के तहत जोखिम का आकलन किया गया था।
ट्रिगर‑1 मूल्यांकन ने उन तालुकों की पहचान की थी जहाँ वर्षा में गिरावट से फसल बोआई और उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। नया पैनल राहत वितरण, जल‑संकट प्रबंधन और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के उपायों की निगरानी करेगा।
राहत राशि मौजूदा योजनाओं जैसे फसल बीमा, ऋण माफी और सीधा नकद सहायता के माध्यम से वितरित की जाएगी, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। राज्य कृषि विभाग ने कहा कि यह निधि इनपुट लागत, क्षतिग्रस्त भूमि की पुनर्स्थापना और आगामी खरीफ मौसम में किसान आय को स्थिर करने के लिए उपयोग की जाएगी।
पैनल में कृषि, जल संसाधन और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो मौसमी स्थिति के अनुसार नियमित बैठकें करेंगे और आवश्यकतानुसार उपायों को समायोजित करेंगे। तत्काल राहत को दीर्घकालिक सूखा‑प्रबंधन योजना से जोड़कर, सरकार महाराष्ट्र के कृषि समुदाय को बाढ़‑पीड़ित और जल‑संकट दोनों चुनौतियों से बचाने की आशा रखती है।
ट्रिगर‑1 मूल्यांकन ने उन तालुकों की पहचान की थी जहाँ वर्षा में गिरावट से फसल बोआई और उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। नया पैनल राहत वितरण, जल‑संकट प्रबंधन और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के उपायों की निगरानी करेगा।
राहत राशि मौजूदा योजनाओं जैसे फसल बीमा, ऋण माफी और सीधा नकद सहायता के माध्यम से वितरित की जाएगी, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। राज्य कृषि विभाग ने कहा कि यह निधि इनपुट लागत, क्षतिग्रस्त भूमि की पुनर्स्थापना और आगामी खरीफ मौसम में किसान आय को स्थिर करने के लिए उपयोग की जाएगी।
पैनल में कृषि, जल संसाधन और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो मौसमी स्थिति के अनुसार नियमित बैठकें करेंगे और आवश्यकतानुसार उपायों को समायोजित करेंगे। तत्काल राहत को दीर्घकालिक सूखा‑प्रबंधन योजना से जोड़कर, सरकार महाराष्ट्र के कृषि समुदाय को बाढ़‑पीड़ित और जल‑संकट दोनों चुनौतियों से बचाने की आशा रखती है।