📷 चित्र स्रोत: Hindustan Times (via NewsData)
राजनीति
एलएस स्पीकर ओम बिरला: संविधान केवल शासन का ढांचा नहीं, राष्ट्र की आत्मा है
✍️ Hindustan Times
🗓 02 नव. 2026, 06:50 PM
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जोर दिया कि भारतीय संविधान देश का आध्यात्मिक और नैतिक आधार है, जो शासन के कानूनी ढांचे से कहीं आगे है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय संविधान को राष्ट्र की आत्मा बताया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इसका महत्व केवल शासन-संस्थाओं के कार्य करने के ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पहचान और एकता को गहराई से प्रभावित करता है।
अध्यक्ष बिरला ने हाल ही में दिए गए एक भाषण में संविधान की उस मूलभूत भूमिका पर प्रकाश डाला, जो देश के सामाजिक और नैतिक ढांचे को निर्धारित करती है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक जीवित दस्तावेज है जो भारतीय लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं और मूल्यों को दर्शाता है।
ओम बिरला के इन शब्दों ने भारतीय राजनीतिक चर्चा में संविधान के प्रति प्रदर्शित गहरे सम्मान को रेखांकित किया है। इसे 'राष्ट्र की आत्मा' कहकर, उन्होंने यह तथ्य पुनः स्थापित किया कि संवैधानिक मूल्य देश की प्रगति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह बयान नागरिकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए एक याद दिलाहट है कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का आधार बने इस संवैधानिक ढांचे के प्रति गहरा सम्मान होना चाहिए।
अध्यक्ष बिरला ने हाल ही में दिए गए एक भाषण में संविधान की उस मूलभूत भूमिका पर प्रकाश डाला, जो देश के सामाजिक और नैतिक ढांचे को निर्धारित करती है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक जीवित दस्तावेज है जो भारतीय लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं और मूल्यों को दर्शाता है।
ओम बिरला के इन शब्दों ने भारतीय राजनीतिक चर्चा में संविधान के प्रति प्रदर्शित गहरे सम्मान को रेखांकित किया है। इसे 'राष्ट्र की आत्मा' कहकर, उन्होंने यह तथ्य पुनः स्थापित किया कि संवैधानिक मूल्य देश की प्रगति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह बयान नागरिकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए एक याद दिलाहट है कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का आधार बने इस संवैधानिक ढांचे के प्रति गहरा सम्मान होना चाहिए।