📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Verma madhu
अपराध
इंदौर अधिकारी पर 1 लाख रुपये जुर्माना, कोर्ट ने आदेश के लिए निरस्त धाराओं पर दंड लगाया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 29 अक्टू. 2026, 10:36 AM
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इंदौर के उच्च न्यायालय ने एक नगर निगम अधिकारी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसने निरस्त धाराओं पर आधारित आदेश जारी किया था, और आदेश दिया कि यह राशि अधिकारी की जेब से चुकाई जाए।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में एक नगर निगम अधिकारी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, क्योंकि उसने निरस्त कानूनी धाराओं पर आधारित आदेश जारी किया था। यह निर्णय बाफना अस्पताल से संबंधित मामले के संदर्भ में लिया गया।
न्यायालय ने पाया कि अधिकारी का कार्य वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन था, अतः दंड लगाया गया। आदेश दिया गया कि यह राशि अधिकारी की अपनी जेब से चुकाई जाए, न कि नगर निगम के खजाने से।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक अधिकारियों को कानून का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। पुरानी या अमान्य धाराओं पर आधारित आदेश जारी करने से व्यक्तिगत वित्तीय दायित्व उत्पन्न हो सकता है।
अधिकारी को सूचित किया गया है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा करे। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह निर्णय मध्यप्रदेश के अन्य स्थानीय शासन निकायों में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक मिसाल के रूप में कार्य करेगा।
न्यायालय ने पाया कि अधिकारी का कार्य वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन था, अतः दंड लगाया गया। आदेश दिया गया कि यह राशि अधिकारी की अपनी जेब से चुकाई जाए, न कि नगर निगम के खजाने से।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक अधिकारियों को कानून का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। पुरानी या अमान्य धाराओं पर आधारित आदेश जारी करने से व्यक्तिगत वित्तीय दायित्व उत्पन्न हो सकता है।
अधिकारी को सूचित किया गया है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा करे। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह निर्णय मध्यप्रदेश के अन्य स्थानीय शासन निकायों में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक मिसाल के रूप में कार्य करेगा।