📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
राजनीति
टीवीके मंत्री ने तमिलनाडु झंडे की माँग को फिर से जीवित किया; बीजेपी ने 'विभाजक' मानसिकता पर किया हमला
✍️ India Today
🗓 02 नव. 2026, 05:37 AM
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टीवीके मंत्री ने तमिलनाडु के लिए अलग झंडे की माँग को फिर से उठाया है, जिस पर बीजेपी ने इस कदम को 'विभाजक' मानसिकता की पराकाष्ठा बताते हुए निंदा की है।
तमिलनाडु में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है क्योंकि तमिल वेट्टी कलाइची (टीवीके) पार्टी के एक मंत्री ने राज्य के लिए अलग झंडे की पुरानी माँग को फिर से उठाया है। इस कदम पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य में 'विभाजक' मानसिकता को बढ़ावा देने की कोशिश बताया है।
बीजेपी ने तर्क दिया कि इस तरह की माँगें राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाती हैं और भारत के संवैधानिक ढाँचे के अनुरूप नहीं हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य को विकास और कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि समाज को विभाजित करने वाले प्रतीकात्मक राजनीतिक कदमों पर।
अभिनेता विजय द्वारा नेतृत्व की जाने वाली टीवीके एक क्षेत्रीय पार्टी है, जो ऐतिहासिक रूप से तमिल लोगों के अधिकारों और पहचान के पक्ष में रही है। इस माँग को फिर से उठाने से यह संकेत मिलता है कि पार्टी भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों से पहले अपनी आधारभूत शक्ति को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस दक्षिण भारत में क्षेत्रीय पहचान पर केंद्रित पार्टियों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच की चलती हुई विचारधारात्मक विभाजक रेखा को उजागर करती है। दोनों पक्षों द्वारा राज्य की पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण पर सार्वजनिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।
बीजेपी ने तर्क दिया कि इस तरह की माँगें राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाती हैं और भारत के संवैधानिक ढाँचे के अनुरूप नहीं हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य को विकास और कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि समाज को विभाजित करने वाले प्रतीकात्मक राजनीतिक कदमों पर।
अभिनेता विजय द्वारा नेतृत्व की जाने वाली टीवीके एक क्षेत्रीय पार्टी है, जो ऐतिहासिक रूप से तमिल लोगों के अधिकारों और पहचान के पक्ष में रही है। इस माँग को फिर से उठाने से यह संकेत मिलता है कि पार्टी भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों से पहले अपनी आधारभूत शक्ति को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस दक्षिण भारत में क्षेत्रीय पहचान पर केंद्रित पार्टियों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच की चलती हुई विचारधारात्मक विभाजक रेखा को उजागर करती है। दोनों पक्षों द्वारा राज्य की पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण पर सार्वजनिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।