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राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की एआईएफ‑एफपीआई लाभार्थियों के खुलासे की याचिका को खारिज किया
✍️ TOI India
🗓 29 अक्टू. 2026, 06:53 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने सांसद महुआ मोइत्रा की एआईएफ और एफपीआई लाभार्थियों के नाम सार्वजनिक करने की याचिका को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिनामूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लाभार्थियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की थी। कोर्ट ने तर्कों को सुनने के बाद कहा कि इस मुद्दे पर अभी न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है और जानकारी के खुलासे का आदेश नहीं दिया गया।
मोहित्रा का कहना था कि एआईएफ और एफपीआई लाभार्थियों की पहचान को उजागर करना फंडों के दुरुपयोग को रोकने और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मौजूदा नियामक ढाँचे में निगरानी के उपाय मौजूद हैं और व्यापक सार्वजनिक खुलासा प्रतिभूति कानून के तहत गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन कर सकता है।
इस निर्णय के बाद यह मामला प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और अन्य नियामक संस्थाओं के अधिकार में रहेगा, जो आवश्यक समझें तो आगे के दिशा‑निर्देश जारी कर सकते हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखने की अदालत की भूमिका को रेखांकित करता है।
कोर्ट ने कोई अतिरिक्त आदेश नहीं दिया और याचिका को बिना पूर्वाग्रह के खारिज कर दिया, जिससे मोइत्रा भविष्य में नई जानकारी मिलने पर पुनः याचिका दायर कर सकती हैं।
मोहित्रा का कहना था कि एआईएफ और एफपीआई लाभार्थियों की पहचान को उजागर करना फंडों के दुरुपयोग को रोकने और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मौजूदा नियामक ढाँचे में निगरानी के उपाय मौजूद हैं और व्यापक सार्वजनिक खुलासा प्रतिभूति कानून के तहत गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन कर सकता है।
इस निर्णय के बाद यह मामला प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और अन्य नियामक संस्थाओं के अधिकार में रहेगा, जो आवश्यक समझें तो आगे के दिशा‑निर्देश जारी कर सकते हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखने की अदालत की भूमिका को रेखांकित करता है।
कोर्ट ने कोई अतिरिक्त आदेश नहीं दिया और याचिका को बिना पूर्वाग्रह के खारिज कर दिया, जिससे मोइत्रा भविष्य में नई जानकारी मिलने पर पुनः याचिका दायर कर सकती हैं।