📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
टेक्नोलॉजी
सिक्वीज़ टेस्ट के समाप्ति के करीब, भारत के देसी बुलेट ट्रेन का सपना साकार
✍️ TOI India
🗓 02 नव. 2026, 08:50 AM
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देशी हाई‑स्पीड रेल के सिक्वीज़ टेस्ट का अंतिम चरण लगभग समाप्त हो रहा है, जो संचालन की तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि नई हाई‑स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए आवश्यक सिक्वीज़ टेस्ट का अंतिम चरण लगभग समाप्त हो रहा है। इस परीक्षण में ट्रैक और ट्रेन को अत्यधिक लोड की स्थिति में रखकर संरचनात्मक स्थिरता की जाँच की जाती है, जिससे व्यावसायिक संचालन से पहले सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि हो सके।
टेस्ट के सफल समापन के बाद परियोजना टीम अगला चरण शुरू करेगी, जिसमें अंतिम सुरक्षा प्रमाणपत्र और यात्री कोचों के साथ परीक्षण दौड़े शामिल हैं। मुंबई‑अहमदाबाद मार्ग पर किया गया यह परीक्षण "देशी बुलेट ट्रेन" पहल का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आयातित तकनीक की जगह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा देना है।
अधिकारियों ने कहा कि अब तक के परिणाम आशाजनक हैं और सभी मापदंड निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के भीतर रहे हैं। सिक्वीज़ टेस्ट की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, रेल विभाग अगले वर्ष की शुरुआत में यात्री परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे पूर्ण व्यावसायिक लॉन्च की समयसीमा तेज होगी।
उद्योग विशेषज्ञ इस प्रगति को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि यह स्वदेशी हाई‑स्पीड रेल को भारत की उन्नत परिवहन बुनियादी ढाँचे की महत्वाकांक्षा का प्रतीक मानते हैं, जिसमें विदेशी सहयोग पर कम निर्भरता रखी जाएगी।
टेस्ट के सफल समापन के बाद परियोजना टीम अगला चरण शुरू करेगी, जिसमें अंतिम सुरक्षा प्रमाणपत्र और यात्री कोचों के साथ परीक्षण दौड़े शामिल हैं। मुंबई‑अहमदाबाद मार्ग पर किया गया यह परीक्षण "देशी बुलेट ट्रेन" पहल का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आयातित तकनीक की जगह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा देना है।
अधिकारियों ने कहा कि अब तक के परिणाम आशाजनक हैं और सभी मापदंड निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के भीतर रहे हैं। सिक्वीज़ टेस्ट की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, रेल विभाग अगले वर्ष की शुरुआत में यात्री परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे पूर्ण व्यावसायिक लॉन्च की समयसीमा तेज होगी।
उद्योग विशेषज्ञ इस प्रगति को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि यह स्वदेशी हाई‑स्पीड रेल को भारत की उन्नत परिवहन बुनियादी ढाँचे की महत्वाकांक्षा का प्रतीक मानते हैं, जिसमें विदेशी सहयोग पर कम निर्भरता रखी जाएगी।