📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subodhgadgil
शिक्षा
राजस्थान: हर महीने 669 सरकारी कॉलेजों की होगी रैंकिंग, नौकरी-केंद्रित पाठ्यक्रम पर फोकस
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 30 अक्टू. 2026, 08:36 AM
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राजस्थान सरकार सभी 669 सरकारी कॉलेजों के लिए मासिक ग्रेडिंग प्रणाली लागू करेगी, जिसमें रोजगार-केंद्रित पाठ्यक्रमों और डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से NAAC रेटिंग में सुधार पर बल दिया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी 669 सरकारी कॉलेजों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक पहल की घोषणा की है। इस नए ढांचे के तहत, हर महीने प्रत्येक संस्थान की ग्रेडिंग और रैंकिंग की जाएगी ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों में निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को प्रोत्साहित करना है। नियमित मूल्यांकन चक्र स्थापित करके, प्रशासन एक प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे कॉलेज उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण और संचालन दक्षता बनाए रखने के लिए प्रेरित होंगे।
मूल्यांकन के प्रमुख पहलुओं में रोजगार-केंद्रित पाठ्यक्रमों का समावेश, डिजिटल लाइब्रेरी का विकास और परिसर की सुविधाओं में समग्र सुधार शामिल हैं। ये मापदंड कॉलेज के उत्पादों को वर्तमान बाजार की मांगों और तकनीकी प्रगति के साथ संरेखित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
इसके अलावा, सरकार ने NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रमाणीकरण परिषद) रेटिंग में सुधार पर बल दिया है। इस पहल में एक सौ साल से पुराने कॉलेजों के ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का भी संकल्प लिया गया है, ताकि आधुनिकीकरण संस्थागत परंपराओं के नुकसान पर न हो।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को प्रोत्साहित करना है। नियमित मूल्यांकन चक्र स्थापित करके, प्रशासन एक प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे कॉलेज उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण और संचालन दक्षता बनाए रखने के लिए प्रेरित होंगे।
मूल्यांकन के प्रमुख पहलुओं में रोजगार-केंद्रित पाठ्यक्रमों का समावेश, डिजिटल लाइब्रेरी का विकास और परिसर की सुविधाओं में समग्र सुधार शामिल हैं। ये मापदंड कॉलेज के उत्पादों को वर्तमान बाजार की मांगों और तकनीकी प्रगति के साथ संरेखित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
इसके अलावा, सरकार ने NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रमाणीकरण परिषद) रेटिंग में सुधार पर बल दिया है। इस पहल में एक सौ साल से पुराने कॉलेजों के ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का भी संकल्प लिया गया है, ताकि आधुनिकीकरण संस्थागत परंपराओं के नुकसान पर न हो।