📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Survey of India
राजनीति
राजस्थान मंत्री राठौड़ ने राहुल गांधी की सड़क राजनीति पर किया तंज
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 30 अक्टू. 2026, 03:41 PM
👁 3
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे को सड़क पर ले जाना ठीक नहीं है।
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने हाल ही में राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर मुद्दे को सड़क पर ले जाना सही नहीं है।
मंत्री राठौड़ ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन हर छोटे-बड़े विवाद को सड़क पर उतारना एक परिपक्व लोकतंत्र के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने राजनीतिक बहस को संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर रखने पर बल दिया, न कि सड़क पर आंदोलन की ओर झुकने पर।
अपने भाषण में राठौड़ ने युवाओं की भूमिका, भारतीय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका और खेलों के राष्ट्रीय विकास में योगदान पर भी प्रकाश डाला। एक पूर्व ओलंपियन के रूप में, उन्होंने युवाओं को खेलों से मिलने वाली अनुशासन और मूल्यों के बारे में बताया और उन्हें देश के प्रगति में सकारात्मक योगदान देने की सलाह दी।
राजस्थान में राजनीतिक वातावरण गर्म हो रहा है, जहाँ विभिन्न नेताओं के बीच शासन और विपक्षी रणनीतियों पर तीखी बहस चल रही है। राठौड़ के टिप्पणियाँ सरकार की उस स्थिति को दर्शाती हैं जो व्यवस्था बनाए रखने और राजनीतिक असहमति के लिए उचित माध्यमों के पक्ष में है।
मंत्री राठौड़ ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन हर छोटे-बड़े विवाद को सड़क पर उतारना एक परिपक्व लोकतंत्र के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने राजनीतिक बहस को संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर रखने पर बल दिया, न कि सड़क पर आंदोलन की ओर झुकने पर।
अपने भाषण में राठौड़ ने युवाओं की भूमिका, भारतीय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका और खेलों के राष्ट्रीय विकास में योगदान पर भी प्रकाश डाला। एक पूर्व ओलंपियन के रूप में, उन्होंने युवाओं को खेलों से मिलने वाली अनुशासन और मूल्यों के बारे में बताया और उन्हें देश के प्रगति में सकारात्मक योगदान देने की सलाह दी।
राजस्थान में राजनीतिक वातावरण गर्म हो रहा है, जहाँ विभिन्न नेताओं के बीच शासन और विपक्षी रणनीतियों पर तीखी बहस चल रही है। राठौड़ के टिप्पणियाँ सरकार की उस स्थिति को दर्शाती हैं जो व्यवस्था बनाए रखने और राजनीतिक असहमति के लिए उचित माध्यमों के पक्ष में है।