📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hemant banswal
वायरल
पुरानी वीडियो को रामलीला मैदान रैली के उपस्थिति के रूप में दिखाया गया, तथ्य-जाँच ने उजागर किया
✍️ The Quint
🗓 02 नव. 2026, 08:45 PM
👁 2
ऑनलाइन साझा की गई एक वीडियो, जो दिल्ली के रामलीला मैदान में हालिया रैली की भीड़ दिखाने का दावा करती है, को तथ्य‑जाँच में पुरानी और असंबंधित फुटेज बताया गया है।
द क्विंट की तथ्य‑जाँच टीम ने एक वीडियो की जांच की, जिसे सोशल मीडिया पर दिल्ली के रामलीला मैदान में हालिया रैली की भीड़ दर्शाने का दावा करके व्यापक रूप से साझा किया गया था। फ़ाइल में मौजूद टाइम‑स्टैम्प, दृश्य संकेत और पहले की रिकॉर्डिंग से तुलना करके पता चला कि यह क्लिप कई साल पुरानी है और किसी अलग सभा की है।
वीडियो में दिखाए गए लैंडमार्क और संकेतक रामलीला मैदान की वर्तमान व्यवस्था से मेल नहीं खाते, और वीडियो में दिखाई देने वाली मौसम स्थितियाँ उस दिन की रिपोर्टेड परिस्थितियों से भिन्न हैं। साथ ही, फ़ाइल के मेटाडाटा से पता चलता है कि इसका निर्माण दिनांक रैली से काफी पहले का है।
भ्रमित करने वाले इस पुराने वीडियो को रैली की उपस्थिति को बढ़ा‑चढ़ा कर दिखाने के उद्देश्य से साझा किया गया था, जो राजनीतिक misinformation में अक्सर देखा जाता है। द क्विंट ने उपयोगकर्ताओं से इस तरह की सामग्री को साझा करने से पहले स्रोत की पुष्टि करने की अपील की, और डिजिटल साक्षरता के महत्व को रेखांकित किया।
रैली के आयोजकों या प्राधिकरणों से इस विषय में कोई आधिकारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं थी, और तथ्य‑जाँच ने रामलीला मैदान रैली की वास्तविक उपस्थिति संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की।
वीडियो में दिखाए गए लैंडमार्क और संकेतक रामलीला मैदान की वर्तमान व्यवस्था से मेल नहीं खाते, और वीडियो में दिखाई देने वाली मौसम स्थितियाँ उस दिन की रिपोर्टेड परिस्थितियों से भिन्न हैं। साथ ही, फ़ाइल के मेटाडाटा से पता चलता है कि इसका निर्माण दिनांक रैली से काफी पहले का है।
भ्रमित करने वाले इस पुराने वीडियो को रैली की उपस्थिति को बढ़ा‑चढ़ा कर दिखाने के उद्देश्य से साझा किया गया था, जो राजनीतिक misinformation में अक्सर देखा जाता है। द क्विंट ने उपयोगकर्ताओं से इस तरह की सामग्री को साझा करने से पहले स्रोत की पुष्टि करने की अपील की, और डिजिटल साक्षरता के महत्व को रेखांकित किया।
रैली के आयोजकों या प्राधिकरणों से इस विषय में कोई आधिकारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं थी, और तथ्य‑जाँच ने रामलीला मैदान रैली की वास्तविक उपस्थिति संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की।