📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA
यात्रा
रुजाना के सांभर लेक में प्रवासी फ्लेमिंगो पहुँचे
✍️ Hindustan Times
🗓 03 नव. 2026, 04:39 PM
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रुजाना के सांभर लेक में प्रवासी फ्लेमिंगो के बड़े झुंड को देखा गया, जिससे पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित हुआ।
भारत का सबसे बड़ा खारा झील और पक्षी अभयारण्य, सांभर लेक ने इस सप्ताह प्रवासी फ्लेमिंगो के बड़े झुंड को स्वागत किया। मध्य एशिया के अपने शीतकालीन आवास से आए ये पक्षी उथले जल में भोजन करते और झील के ऊपर विशिष्ट V‑आकार की उड़ान बनाते देखे गए।
स्थानीय वन्यजीव अधिकारी ने बताया कि यह आगमन पक्षियों की सामान्य प्रवास अवधि, अर्थात् अक्टूबर से फरवरी के बीच, के अनुरूप है। झील की उच्च खारापन और समृद्ध भोजन स्रोत इन शीतकालीन महीनों में फ्लेमिंगो के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं।
इस दृश्य ने पक्षी प्रेमियों और प्रकृति फोटोग्राफरों का ध्यान आकर्षित किया, जो अब अभयारण्य के निरीक्षण बिंदुओं पर इकट्ठा हो रहे हैं। अधिकारियों ने दर्शकों से पक्षियों को परेशान न करने और अभयारण्य के नियमों का पालन करने का अनुरोध किया है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कई सौ फ्लेमिंगो मौजूद हैं, हालांकि विस्तृत सर्वेक्षण के बाद सटीक संख्या ज्ञात होगी। इस प्रवास से क्षेत्र में इको‑टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ होगा और जलस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का महत्व उजागर होगा।
अधिकारी जल स्तर और आवासीय परिस्थितियों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं ताकि आने वाले महीनों में प्रवासी प्रजातियों के लिए यह झील एक सुरक्षित ठहराव बना रहे।
स्थानीय वन्यजीव अधिकारी ने बताया कि यह आगमन पक्षियों की सामान्य प्रवास अवधि, अर्थात् अक्टूबर से फरवरी के बीच, के अनुरूप है। झील की उच्च खारापन और समृद्ध भोजन स्रोत इन शीतकालीन महीनों में फ्लेमिंगो के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं।
इस दृश्य ने पक्षी प्रेमियों और प्रकृति फोटोग्राफरों का ध्यान आकर्षित किया, जो अब अभयारण्य के निरीक्षण बिंदुओं पर इकट्ठा हो रहे हैं। अधिकारियों ने दर्शकों से पक्षियों को परेशान न करने और अभयारण्य के नियमों का पालन करने का अनुरोध किया है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कई सौ फ्लेमिंगो मौजूद हैं, हालांकि विस्तृत सर्वेक्षण के बाद सटीक संख्या ज्ञात होगी। इस प्रवास से क्षेत्र में इको‑टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ होगा और जलस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का महत्व उजागर होगा।
अधिकारी जल स्तर और आवासीय परिस्थितियों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं ताकि आने वाले महीनों में प्रवासी प्रजातियों के लिए यह झील एक सुरक्षित ठहराव बना रहे।