📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Samudra Bikash Hazarika
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विज्ञान
मणिपुर के माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने सिखिम के दुर्लभ औषधीय पौधे में नई फंगस की खोज की
✍️ India Today NE
🗓 29 अक्टू. 2026, 09:43 PM
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मणिपुर के माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने सिखिम के दुर्लभ औषधीय पौधे पर नई फंगस प्रजाति की पहचान की, जो भारत की जैव विविधता में एक महत्वपूर्ण जोड़ है।
मणिपुर के एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने सिखिम के पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाले एक दुर्लभ औषधीय पौधे पर नई फंगस प्रजाति की खोज की है। यह खोज हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में उजागर की गई है, जिसमें पौधे और फंगस के बीच विशिष्ट पारस्परिक संबंधों को बताया गया है।
यह औषधीय पौधा पारम्परिक सिखिमीय चिकित्सा में अपनी उपचारात्मक गुणों के कारण जाना जाता है, परन्तु सीमित प्राकृतिक वितरण और आवासीय दबावों के कारण इसकी संख्या घटती जा रही है। शोधकर्ताओं ने क्षेत्र के अल्पाइन मेडोज़ में नमूने एकत्र किए, जहाँ फंगस ने पौधे की पत्तियों पर स्पष्ट मायसेलियल संरचनाएँ बनायीं।
प्रयोगशाला में किए गए विश्लेषण से पता चला कि यह फंगस किसी भी मौजूदा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज नहीं है, जिससे यह भारतीय उपमहाद्वीप की फंगस वर्गीकरण में नई प्रजाति के रूप में सामने आती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पौधे‑फंगस अंतःक्रिया और संभावित औषधीय उपयोगों के अध्ययन के नए रास्ते खोल सकती है।
टीम आगे जीन अनुक्रमण और पारिस्थितिक मूल्यांकन करके इस फंगस की पौधे के स्वास्थ्य में भूमिका और पर्यावरणीय महत्व को समझने की योजना बना रही है। यह खोज सिखिम के जैव विविधता क्षेत्रों के संरक्षण के महत्व को दोहराती है, जहाँ अभी भी अनजाने जीव संसाधन मौजूद हैं।
यह औषधीय पौधा पारम्परिक सिखिमीय चिकित्सा में अपनी उपचारात्मक गुणों के कारण जाना जाता है, परन्तु सीमित प्राकृतिक वितरण और आवासीय दबावों के कारण इसकी संख्या घटती जा रही है। शोधकर्ताओं ने क्षेत्र के अल्पाइन मेडोज़ में नमूने एकत्र किए, जहाँ फंगस ने पौधे की पत्तियों पर स्पष्ट मायसेलियल संरचनाएँ बनायीं।
प्रयोगशाला में किए गए विश्लेषण से पता चला कि यह फंगस किसी भी मौजूदा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज नहीं है, जिससे यह भारतीय उपमहाद्वीप की फंगस वर्गीकरण में नई प्रजाति के रूप में सामने आती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पौधे‑फंगस अंतःक्रिया और संभावित औषधीय उपयोगों के अध्ययन के नए रास्ते खोल सकती है।
टीम आगे जीन अनुक्रमण और पारिस्थितिक मूल्यांकन करके इस फंगस की पौधे के स्वास्थ्य में भूमिका और पर्यावरणीय महत्व को समझने की योजना बना रही है। यह खोज सिखिम के जैव विविधता क्षेत्रों के संरक्षण के महत्व को दोहराती है, जहाँ अभी भी अनजाने जीव संसाधन मौजूद हैं।