📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Fotokannan
राजनीति
केरल CM सतीशान ने PSC अध्यक्ष हटाने को लेकर पूर्व राज्यपाल आर्लेकर पर लगाया आरोप
✍️ NDTV Top
🗓 04 नव. 2026, 06:59 PM
👁 2
केरल मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने दावा किया कि पूर्व राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर ने राज्य सरकार से परामर्श के बिना PSC अध्यक्ष एम.आर. बाजु की हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी थी।
केरल की राजनीति में नए गतिरोध की शुरुआत हो गई है, जहाँ मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) अध्यक्ष एम.आर. बाजु के हटाने को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री का दावा है कि इस प्रक्रिया में संवैधानिक मानकों का पालन नहीं किया गया और राज्य सरकार से परामर्श नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री सतीशान ने पूर्व राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने KPSC अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश सीधे राष्ट्रपति को भेजी। सतीशान ने तर्क दिया कि इस तरह का महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार राज्य सरकार की सहमति के साथ लिया जाना चाहिए था, लेकिन यह कदम अनदेखा किया गया।
यह विवाद केरल में राज्य सरकार और राज्यपाल के कार्यालय के बीच शक्ति संतुलन पर चर्चाओं को नई गति देता है। मुख्यमंत्री की टिप्पणी से पता चलता है कि राज्य के सार्वजनिक सेवा संरचना में उच्च स्तरीय नियुक्तियों और हटाने की प्रक्रिया की प्रक्रियात्मक अखंडता को लेकर व्यापक असहमति मौजूद है।
यह घटना शासक दल और विपक्षी गुटों के बीच चल रहे घर्षण को उजागर करती है, जो इस प्रशासनिक विवाद के राज्य की शासन व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री सतीशान ने पूर्व राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने KPSC अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश सीधे राष्ट्रपति को भेजी। सतीशान ने तर्क दिया कि इस तरह का महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार राज्य सरकार की सहमति के साथ लिया जाना चाहिए था, लेकिन यह कदम अनदेखा किया गया।
यह विवाद केरल में राज्य सरकार और राज्यपाल के कार्यालय के बीच शक्ति संतुलन पर चर्चाओं को नई गति देता है। मुख्यमंत्री की टिप्पणी से पता चलता है कि राज्य के सार्वजनिक सेवा संरचना में उच्च स्तरीय नियुक्तियों और हटाने की प्रक्रिया की प्रक्रियात्मक अखंडता को लेकर व्यापक असहमति मौजूद है।
यह घटना शासक दल और विपक्षी गुटों के बीच चल रहे घर्षण को उजागर करती है, जो इस प्रशासनिक विवाद के राज्य की शासन व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी कर रहे हैं।