📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / A.Savin
अपराध
जयपुर कोर्ट ने कहा, किसी और के लिए करवा चौथ मनाना मानसिक अत्याचार है
✍️ NDTV
🗓 29 अक्टू. 2026, 11:45 AM
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जयपुर के एक न्यायालय ने फैसला सुनाया कि किसी और के लिए करवा चौथ मनाना मानसिक अत्याचार है, जब उसके पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी का किसी और पुरुष के साथ व्यवहार सामान्य मित्रता से परे था।
जयपुर के एक न्यायालय ने निर्णय दिया कि किसी और के लिए करवा चौथ मनाना मानसिक अत्याचार के बराबर है। यह मामला एक पति द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी का किसी अन्य पुरुष के साथ व्यवहार सामान्य मित्रता से परे है।
न्यायाधीश ने कहा कि करवा चौथ एक वैवाहिक अनुष्ठान है और पति के अलावा किसी और के लिए इसे मनाना वैवाहिक विश्वास का उल्लंघन माना जा सकता है। अदालत ने पत्नी को यह अभ्यास बंद करने और पति को परामर्श लेने का निर्देश दिया।
यह निर्णय दिखाता है कि अदालतें मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक दुरुपयोग पर बढ़ती नजर रख रही हैं। यह पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों में वैवाहिक व्रतों का सम्मान करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
मामला आगे की सुनवाई के लिए लंबित है, और दोनों पक्षों को अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।
इस निर्णय से समान विवादों में मानसिक अत्याचार और वैवाहिक अनुष्ठानों से संबंधित मामलों के लिए मिसाल कायम होने की उम्मीद है।
न्यायाधीश ने कहा कि करवा चौथ एक वैवाहिक अनुष्ठान है और पति के अलावा किसी और के लिए इसे मनाना वैवाहिक विश्वास का उल्लंघन माना जा सकता है। अदालत ने पत्नी को यह अभ्यास बंद करने और पति को परामर्श लेने का निर्देश दिया।
यह निर्णय दिखाता है कि अदालतें मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक दुरुपयोग पर बढ़ती नजर रख रही हैं। यह पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों में वैवाहिक व्रतों का सम्मान करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
मामला आगे की सुनवाई के लिए लंबित है, और दोनों पक्षों को अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।
इस निर्णय से समान विवादों में मानसिक अत्याचार और वैवाहिक अनुष्ठानों से संबंधित मामलों के लिए मिसाल कायम होने की उम्मीद है।