📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dietmar Rabich
बिज़नेस
भारतीय निवेशकों को 100 करोड़ का नुकसान, Apple‑Tesla‑Nvidia के शेयर बिना अनुमति बेचे
✍️ Aaj Tak
🗓 04 नव. 2026, 07:00 PM
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एक घोटाले में भारतीय निवेशकों के Apple, Tesla और Nvidia के शेयर उनकी अनुमति के बिना बेचे गए, जिससे लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
भारत में प्रतिभूति नियामक SEBI ने एक बड़े पैमाने पर घोटाले की पहचान की है, जिसमें कई भारतीय खुदरा निवेशकों के Apple, Tesla और Nvidia के शेयर उनकी अनुमति के बिना बेचे गए और बदले में कुछ चीनी कंपनियों के शेयर खरीदे गए।
प्रारम्भिक गणनाओं के अनुसार, इस धोखाधड़ी से लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जो बेचे गए अमेरिकी तकनीकी शेयरों के बाजार मूल्य पर आधारित है। निवेशकों ने बताया कि उनके डिमैट खाते से ये शेयर अचानक गायब हो गए और अनजाने चीनी कंपनियों की नई पोजीशन दिखाई देने लगी।
SEBI ने संबंधित ब्रोकरेज फर्मों को नोटिस जारी कर इस अनधिकृत लेन‑देन के कारणों की स्पष्टता मांगी है। साथ ही, निवेशकों को लेन‑देन अलर्ट की जाँच करने और किसी भी विसंगति की तुरंत रिपोर्ट करने की चेतावनी दी गई है। प्रभावित खातों की फोरेंसिक जांच चल रही है ताकि धन के प्रवाह को ट्रेस किया जा सके और जिम्मेदारों की पहचान हो सके।
यह मामला हाल के महीनों में सामने आए कई विदेशी शेयर निवेश घोटालों में से एक है, जिससे भारत में डिमैट खाता सुरक्षा और विदेशी‑शेयर ट्रेडिंग सेवाओं के अनुपालन पर कड़ी निगरानी की मांग बढ़ रही है।
प्रारम्भिक गणनाओं के अनुसार, इस धोखाधड़ी से लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जो बेचे गए अमेरिकी तकनीकी शेयरों के बाजार मूल्य पर आधारित है। निवेशकों ने बताया कि उनके डिमैट खाते से ये शेयर अचानक गायब हो गए और अनजाने चीनी कंपनियों की नई पोजीशन दिखाई देने लगी।
SEBI ने संबंधित ब्रोकरेज फर्मों को नोटिस जारी कर इस अनधिकृत लेन‑देन के कारणों की स्पष्टता मांगी है। साथ ही, निवेशकों को लेन‑देन अलर्ट की जाँच करने और किसी भी विसंगति की तुरंत रिपोर्ट करने की चेतावनी दी गई है। प्रभावित खातों की फोरेंसिक जांच चल रही है ताकि धन के प्रवाह को ट्रेस किया जा सके और जिम्मेदारों की पहचान हो सके।
यह मामला हाल के महीनों में सामने आए कई विदेशी शेयर निवेश घोटालों में से एक है, जिससे भारत में डिमैट खाता सुरक्षा और विदेशी‑शेयर ट्रेडिंग सेवाओं के अनुपालन पर कड़ी निगरानी की मांग बढ़ रही है।