📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Iitj123
टेक्नोलॉजी
आईआईटी जोधपुर ने एआई से प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित और पठनीय बनाया
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 04 नव. 2026, 10:36 AM
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आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता एआई तकनीक के माध्यम से छह प्राचीन लिपियों को डिजिटाइज़ और पुनर्स्थापित कर पठनीय बना रहे हैं।
आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहे हैं, जो अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
टीम ने छह अलग-अलग लिपियों पर ध्यान केंद्रित किया है, एआई एल्गोरिदम का उपयोग करके धुंधले स्याही को बेहतर बनाते हुए और गायब हिस्सों को पुनर्निर्मित करते हुए, जिससे पाठ पहली बार पठनीय हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य इतिहासकारों और भाषाविदों को प्राथमिक स्रोतों तक अभूतपूर्व पहुँच प्रदान करेगा, जिससे क्षेत्रीय इतिहास की समझ में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।
यह परियोजना आईआईटी जोधपुर की व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसमें मशीन लर्निंग को सांस्कृतिक संरक्षण में लागू किया जा रहा है, और राष्ट्रीय अभिलेखागार व भारत के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग की योजना है।
टीम ने छह अलग-अलग लिपियों पर ध्यान केंद्रित किया है, एआई एल्गोरिदम का उपयोग करके धुंधले स्याही को बेहतर बनाते हुए और गायब हिस्सों को पुनर्निर्मित करते हुए, जिससे पाठ पहली बार पठनीय हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य इतिहासकारों और भाषाविदों को प्राथमिक स्रोतों तक अभूतपूर्व पहुँच प्रदान करेगा, जिससे क्षेत्रीय इतिहास की समझ में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।
यह परियोजना आईआईटी जोधपुर की व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसमें मशीन लर्निंग को सांस्कृतिक संरक्षण में लागू किया जा रहा है, और राष्ट्रीय अभिलेखागार व भारत के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग की योजना है।