📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
मनोरंजन
कलर्स टीवी के 'महादेव एंड सन्स' में इंटीमेट सीन पर दर्शकों की तीखी प्रतिक्रिया
✍️ Aaj Tak
🗓 30 अक्टू. 2026, 06:15 PM
👁 3
कलर्स टीवी के परिवारिक शो 'महादेव एंड सन्स' में धीरज और रज्जी के बीच इंटीमेट सीन को लेकर सोशल मीडिया पर दर्शकों ने कड़ी निंदा की, यह कहते हुए कि शो ने मर्यादा पार कर ली है।
कलर्स टीवी पर प्रसारित हो रहा परिवारिक ड्रामा 'महादेव एंड सन्स' ने सोमवार को धीरज और रज्जी के बीच एक इंटीमेट सीन दिखाया। यह दृश्य, जिसे दर्शकों ने पारिवारिक धारावाहिकों के लिए असामान्य रूप से स्पष्ट बताया, सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड बना।
ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ताओं ने शो की मर्यादा पार करने की आलोचना की। कई टिप्पणीकारों ने हैशटैग के माध्यम से निर्माताओं से ऐसे कंटेंट को कम करने और पारिवारिक स्वरूप पर कायम रहने की मांग की।
प्रोडक्शन हाउस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, पर उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय टेलीविजन अब दर्शकों को बनाए रखने के लिए अधिक परिपक्व विषयों को आज़मा रहा है। हालांकि, दर्शकों की अपेक्षाओं से हटने पर तेज़ी से प्रतिक्रिया मिल सकती है, जैसा कि इस मामले में देखा गया।
वर्तमान में प्रसारण नियामकों ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, पर इस एपिसोड की प्रसारण मानकों के अनुरूपता की समीक्षा की जा सकती है। यह घटना भारतीय धारावाहिकों को रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है।
ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ताओं ने शो की मर्यादा पार करने की आलोचना की। कई टिप्पणीकारों ने हैशटैग के माध्यम से निर्माताओं से ऐसे कंटेंट को कम करने और पारिवारिक स्वरूप पर कायम रहने की मांग की।
प्रोडक्शन हाउस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, पर उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय टेलीविजन अब दर्शकों को बनाए रखने के लिए अधिक परिपक्व विषयों को आज़मा रहा है। हालांकि, दर्शकों की अपेक्षाओं से हटने पर तेज़ी से प्रतिक्रिया मिल सकती है, जैसा कि इस मामले में देखा गया।
वर्तमान में प्रसारण नियामकों ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, पर इस एपिसोड की प्रसारण मानकों के अनुरूपता की समीक्षा की जा सकती है। यह घटना भारतीय धारावाहिकों को रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है।