📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / DesiBoy101
टेक्नोलॉजी
सीआईडीसीओ ने जल संकट से निपटने के लिए जीपीएस‑ट्रैक्ड टैंकर, ओटीपी एक्सेस और सीसीटीवी लागू किए
✍️ Mid-Day
🗓 30 अक्टू. 2026, 09:40 PM
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सीआईडीसीओ ने जल संकट के बीच पानी की हानि रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस‑सक्षम टैंकर, ओटीपी प्रवेश प्रणाली और सीसीटीवी निगरानी लागू करने की घोषणा की।
शहर व औद्योगिक विकास निगम (सीआईडीसीओ) ने जल संकट के बीच पानी की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी‑आधारित योजना का खुलासा किया है। इस योजना के तहत सीआईडीसीओ के अधीन सभी जल टैंकरों में जीपीएस डिवाइस लगाए जाएंगे, जो वास्तविक‑समय में उनका स्थान केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को भेजेगा।
ट्रैकिंग के साथ, निगम टैंकर डिलीवरी बिंदुओं पर ओटीपी‑आधारित प्रवेश प्रणाली लागू करेगा, जिससे उपभोक्ताओं को पानी निकालने से पहले उनके मोबाइल पर एक बार का पासवर्ड मिलेगा। यह उपाय अनधिकृत चोरी को रोकने और निर्धारित मात्रा को सही घरों तक पहुँचाने के लिए है।
मुख्य वितरण केंद्रों और टैंकर लोडिंग क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे लेन‑देनों की दृश्य पुष्टि संभव होगी। जीपीएस, ओटीपी और वीडियो निगरानी के संयुक्त उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी, चोरी कम होगी और किसी भी अनियमितता पर तेज़ प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
सीआईडीसीओ के अधिकारियों ने बताया कि पायलट चरण पुणे और उसके आसपास के चयनित क्षेत्रों में अगले दो हफ्तों में शुरू होगा, और पूरी कार्यवाही अगले तीन महीनों में पूरी की जाएगी। उन्होंने जल की तीव्र कमी को संभालने में सहयोग का अनुरोध किया।
निगम ने कहा कि ये कदम सीमित संसाधनों की रक्षा करने और जल आपूर्ति प्रबंधन को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
ट्रैकिंग के साथ, निगम टैंकर डिलीवरी बिंदुओं पर ओटीपी‑आधारित प्रवेश प्रणाली लागू करेगा, जिससे उपभोक्ताओं को पानी निकालने से पहले उनके मोबाइल पर एक बार का पासवर्ड मिलेगा। यह उपाय अनधिकृत चोरी को रोकने और निर्धारित मात्रा को सही घरों तक पहुँचाने के लिए है।
मुख्य वितरण केंद्रों और टैंकर लोडिंग क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे लेन‑देनों की दृश्य पुष्टि संभव होगी। जीपीएस, ओटीपी और वीडियो निगरानी के संयुक्त उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी, चोरी कम होगी और किसी भी अनियमितता पर तेज़ प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
सीआईडीसीओ के अधिकारियों ने बताया कि पायलट चरण पुणे और उसके आसपास के चयनित क्षेत्रों में अगले दो हफ्तों में शुरू होगा, और पूरी कार्यवाही अगले तीन महीनों में पूरी की जाएगी। उन्होंने जल की तीव्र कमी को संभालने में सहयोग का अनुरोध किया।
निगम ने कहा कि ये कदम सीमित संसाधनों की रक्षा करने और जल आपूर्ति प्रबंधन को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।