📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vijay kumar sinha bihar
कृषि
बिहार में 'खेत बचाओ, जीवन बचाओ' अभियान: 534 प्रखंडों तक पहुंचेगा, किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 30 अक्टू. 2026, 09:37 PM
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बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 'खेत बचाओ, जीवन बचाओ' अभियान की घोषणा की, जिसका लक्ष्य 30 नवंबर 2026 तक 534 प्रखंडों तक पहुंचना है।
बिहार सरकार 'खेत बचाओ, जीवन बचाओ' अभियान को एक जन-आंदोलन में बदलने की तैयारी में है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य भर के किसानों को सशक्त बनाना है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हाल ही में पटना में इस अभियान के विस्तार से विवरण प्रस्तुत किए, जहां उन्होंने टिकाऊ कृषि प्रथाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस योजना के तहत मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना प्रमुख प्राथमिकता होगी। सरकार किसानों को व्यापक प्रशिक्षण देने का इरादा रखती है ताकि वे इन पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को प्रभावी ढंग से अपना सकें और अपने खेतों की उपजाऊ क्षमता को बनाए रख सकें।
अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा, जिसका विशिष्ट लक्ष्य राज्य के सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचना है। प्रत्येक प्रखंड तक इस जागरूकता अभियान का विस्तार करके, प्रशासन स्थानीय कृषि समुदायों पर व्यापक प्रभाव डालने की उम्मीद रखता है।
मंत्री सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मूल उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करना है। यह कार्यक्रम केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि श्रमिकों से सीधे जुड़कर बिहार के कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित करना चाहता है।
इस योजना के तहत मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना प्रमुख प्राथमिकता होगी। सरकार किसानों को व्यापक प्रशिक्षण देने का इरादा रखती है ताकि वे इन पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को प्रभावी ढंग से अपना सकें और अपने खेतों की उपजाऊ क्षमता को बनाए रख सकें।
अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा, जिसका विशिष्ट लक्ष्य राज्य के सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचना है। प्रत्येक प्रखंड तक इस जागरूकता अभियान का विस्तार करके, प्रशासन स्थानीय कृषि समुदायों पर व्यापक प्रभाव डालने की उम्मीद रखता है।
मंत्री सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मूल उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करना है। यह कार्यक्रम केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि श्रमिकों से सीधे जुड़कर बिहार के कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित करना चाहता है।