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शिक्षा
भोपाल के 11वीं कक्षा के छात्र ने गौरैया संरक्षण सम्मेलन में तीसरा स्थान हासिल किया
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 02 नव. 2026, 05:37 PM
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भोपाल के सरकारी स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र प्रसन्न शर्मा ने दो साल के शोध के बाद श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय गौरैया संरक्षण सम्मेलन में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
भोपाल, मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र प्रसन्न शर्मा ने दो साल की मेहनत के बाद श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गौरैया संरक्षण सम्मेलन में तीसरा स्थान हासिल किया। इस प्रतियोगिता में कई देशों के प्रतिभागी शामिल थे और शहरी गौरैया की सुरक्षा के लिए नवाचारी उपायों को प्रस्तुत किया गया।
शर्मा ने अपने पड़ोस में क्षेत्रीय सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाकर एक कम लागत वाला, दोहराने योग्य मॉडल तैयार किया। इस मॉडल में घोंसला बॉक्स बनाना, स्वदेशी बीज वाले पौधे लगाना और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाना शामिल था।
श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय ऑर्निथोलॉजी सोसाइटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन ने शर्मा के कार्य को उसकी व्यावहारिकता और विस्तार क्षमता के कारण सम्मानित किया। पुरस्कार समारोह में उनके मार्गदर्शक शिक्षक को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने शोध में सहायता और सामग्री के लिए निधि जुटाने में मदद की।
मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि की सराहना की, यह कहते हुए कि यह छात्र‑प्रेरित पर्यावरणीय पहल की संभावनाओं को उजागर करता है। शर्मा अपने मॉडल को राज्य के अन्य जिलों में फैलाने और शहरों में घटती गौरैया की संख्या को रोकने की योजना बना रहे हैं।
शर्मा ने अपने पड़ोस में क्षेत्रीय सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाकर एक कम लागत वाला, दोहराने योग्य मॉडल तैयार किया। इस मॉडल में घोंसला बॉक्स बनाना, स्वदेशी बीज वाले पौधे लगाना और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाना शामिल था।
श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय ऑर्निथोलॉजी सोसाइटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन ने शर्मा के कार्य को उसकी व्यावहारिकता और विस्तार क्षमता के कारण सम्मानित किया। पुरस्कार समारोह में उनके मार्गदर्शक शिक्षक को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने शोध में सहायता और सामग्री के लिए निधि जुटाने में मदद की।
मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि की सराहना की, यह कहते हुए कि यह छात्र‑प्रेरित पर्यावरणीय पहल की संभावनाओं को उजागर करता है। शर्मा अपने मॉडल को राज्य के अन्य जिलों में फैलाने और शहरों में घटती गौरैया की संख्या को रोकने की योजना बना रहे हैं।