📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
मनोरंजन
नीतेश तिवारी के वैश्विक रामायण में VFX की कहानी
✍️ NDTV
🗓 04 नव. 2026, 03:43 AM
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NDTV ने नीतेश तिवारी के रामायण सीरीज़ के VFX काम को दिखाया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता का लक्ष्य रखता है।
नीतेश तिवारी द्वारा निर्देशित नई श्रृंखला ‘रामायण’ में प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं को विश्वभर के दर्शकों तक पहुँचाने के लिए अत्याधुनिक विज़ुअल इफ़ेक्ट्स का प्रयोग किया गया है। NDTV के अनुसार, इस प्रोजेक्ट ने प्रमुख VFX स्टूडियो के साथ मिलकर अयोध्या, लंका और स्वर्गीय क्षेत्रों को हाई‑रिज़ॉल्यूशन CGI के माध्यम से पुनः निर्मित किया है।
विज़ुअल इफ़ेक्ट्स प्रक्रिया में मोशन‑कैप्चर, डिजिटल सेट एक्सटेंशन और यथार्थवादी कण सिमुलेशन शामिल हैं, जिससे युद्ध, दिव्य हथियार और अलौकिक घटनाओं को जीवंत रूप दिया गया है। इन तकनीकों से निर्माताओं का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फैंटेसी एपिक के समान उत्पादन मानक हासिल करना है, साथ ही सांस्कृतिक सच्चाई को बरकरार रखना है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह श्रृंखला भारतीय मनोरंजन में एक नई दिशा दर्शाती है, जहाँ पौराणिक कहानियों को तकनीकी‑आधारित सौंदर्यशास्त्र के साथ पैकेज किया जा रहा है, जिससे घरेलू दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म भी आकर्षित हों।
VFX कार्य अभी पोस्ट‑प्रोडक्शन में है और इस वर्ष के अंत में श्रृंखला के लॉन्च पर इसे प्रमुख आकर्षण माना जाएगा, जिससे ‘रामायण’ भविष्य के भारतीय पौराणिक प्रोजेक्ट्स के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है।
विज़ुअल इफ़ेक्ट्स प्रक्रिया में मोशन‑कैप्चर, डिजिटल सेट एक्सटेंशन और यथार्थवादी कण सिमुलेशन शामिल हैं, जिससे युद्ध, दिव्य हथियार और अलौकिक घटनाओं को जीवंत रूप दिया गया है। इन तकनीकों से निर्माताओं का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फैंटेसी एपिक के समान उत्पादन मानक हासिल करना है, साथ ही सांस्कृतिक सच्चाई को बरकरार रखना है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह श्रृंखला भारतीय मनोरंजन में एक नई दिशा दर्शाती है, जहाँ पौराणिक कहानियों को तकनीकी‑आधारित सौंदर्यशास्त्र के साथ पैकेज किया जा रहा है, जिससे घरेलू दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म भी आकर्षित हों।
VFX कार्य अभी पोस्ट‑प्रोडक्शन में है और इस वर्ष के अंत में श्रृंखला के लॉन्च पर इसे प्रमुख आकर्षण माना जाएगा, जिससे ‘रामायण’ भविष्य के भारतीय पौराणिक प्रोजेक्ट्स के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है।