📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
राजनीति
अज़म खान ने एनडीआर द्वारा गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
✍️ TOI India
🗓 03 नव. 2026, 01:42 PM
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पूर्व सांसद अज़म खान ने एनडीआर द्वारा गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, 2017 से 95 लंबित मामलों का हवाला देते हुए। अदालत अब हिरासत की वैधता पर विचार करेगी।
पूर्व सांसद अज़म खान ने एनडीआर द्वारा अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह कदम तब आया जब एनडीआर ने वित्तीय और भ्रष्टाचार से संबंधित कई आरोपों के तहत खान को गिरफ्तार किया।
कhan, जिन पर 2017 से 95 मामले चल रहे हैं, दावा करते हैं कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक रूप से प्रेरित है और वे अस्थायी रिहाई चाहते हैं। वे तर्क देते हैं कि एनडीआर की कार्रवाई उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और साक्ष्य की समीक्षा की मांग करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने खान की याचिका के तथ्यों की जाँच के लिए सुनवाई तय की है और यह तय करेगा कि एनडीआर की हिरासत कानूनी तौर पर वैध है या नहीं। इस निर्णय से समान जांच में राजनीतिक हस्तियों के साथ व्यवहार के लिए मिसाल कायम हो सकती है।
कhan के वकील अदालत से अनुरोध करते हैं कि वे मुकदमे के परिणाम तक रिहाई दें, क्योंकि ठोस साक्ष्य की कमी और उनके राजनीतिक करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए। एनडीआर का कहना है कि गिरफ्तारी उनके द्वारा एकत्रित पर्याप्त साक्ष्य पर आधारित थी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक स्वतंत्रता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस को उजागर करता है।
कhan, जिन पर 2017 से 95 मामले चल रहे हैं, दावा करते हैं कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक रूप से प्रेरित है और वे अस्थायी रिहाई चाहते हैं। वे तर्क देते हैं कि एनडीआर की कार्रवाई उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और साक्ष्य की समीक्षा की मांग करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने खान की याचिका के तथ्यों की जाँच के लिए सुनवाई तय की है और यह तय करेगा कि एनडीआर की हिरासत कानूनी तौर पर वैध है या नहीं। इस निर्णय से समान जांच में राजनीतिक हस्तियों के साथ व्यवहार के लिए मिसाल कायम हो सकती है।
कhan के वकील अदालत से अनुरोध करते हैं कि वे मुकदमे के परिणाम तक रिहाई दें, क्योंकि ठोस साक्ष्य की कमी और उनके राजनीतिक करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए। एनडीआर का कहना है कि गिरफ्तारी उनके द्वारा एकत्रित पर्याप्त साक्ष्य पर आधारित थी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक स्वतंत्रता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस को उजागर करता है।