📷 चित्र स्रोत: Hindustan Times (via NewsData)
राजनीति
अखिलेश यादव ने केशव मौर्य पर निशाना: 'PDA की जीत पर गुप्त रूप से खुश'
✍️ Hindustan Times
🗓 29 अक्टू. 2026, 08:44 AM
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MLC चुनावों के बाद यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य पर अखिलेश यादव ने तीखा निशाना साधा। SP प्रमुख का आरोप है कि BJP नेता PDA की जीत पर गुप्त रूप से खुश हैं।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनावों के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। यूपी के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य पर तीखा हमला किया है। अखिलेश का आरोप है कि पीडीए (PDA) की जीत पर केशव मौर्य 'गुप्त रूप से खुश' हैं, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
यह बयान यूपी विधान परिषद के 11 सीटों के चुनावों के नतीजों के बाद आया है, जिनमें से 11 सीटें स्नातक और शिक्षक वर्ग की थीं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें अपने नाम कीं। हालांकि, सीटों की संख्या में भाजपा के आगे होने के बावजूद, अखिलेश यादव ने केशव मौर्य के रुख को लेकर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव के इस बयान से यूपी की राजनीति में सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच चल रही तकरार को नई गति मिली है। विधान परिषद के चुनाव अक्सर राज्य में राजनीतिक शक्ति का संकेत माने जाते हैं, इसलिए हर सीट पर कड़ी लड़ाई होती है। अखिलेश यादव का यह कदम भाजपा के प्रमुख नेता केशव मौर्य की छवि को प्रभावित करने और पीडीए की जीत को राजनीतिक हार के रूप में पेश करने की कोशिश है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि यूपी में विधान परिषद के चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं, जहां क्षेत्रीय गठबंधन और नेताओं की लोकप्रियता अंतिम नतीजे तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों के आसार में, ऐसे सार्वजनिक बयान सत्ताधारी और विपक्षी दलों की रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
यह बयान यूपी विधान परिषद के 11 सीटों के चुनावों के नतीजों के बाद आया है, जिनमें से 11 सीटें स्नातक और शिक्षक वर्ग की थीं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें अपने नाम कीं। हालांकि, सीटों की संख्या में भाजपा के आगे होने के बावजूद, अखिलेश यादव ने केशव मौर्य के रुख को लेकर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव के इस बयान से यूपी की राजनीति में सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच चल रही तकरार को नई गति मिली है। विधान परिषद के चुनाव अक्सर राज्य में राजनीतिक शक्ति का संकेत माने जाते हैं, इसलिए हर सीट पर कड़ी लड़ाई होती है। अखिलेश यादव का यह कदम भाजपा के प्रमुख नेता केशव मौर्य की छवि को प्रभावित करने और पीडीए की जीत को राजनीतिक हार के रूप में पेश करने की कोशिश है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि यूपी में विधान परिषद के चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं, जहां क्षेत्रीय गठबंधन और नेताओं की लोकप्रियता अंतिम नतीजे तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों के आसार में, ऐसे सार्वजनिक बयान सत्ताधारी और विपक्षी दलों की रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।